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8 December 2015

उजाले अँधेरों से मिलने जो आये


उजाले अँधेरों से मिलने जो आये
धुंधलाने  गए तब, शामों  के साये  ..

समय की सुराही  में समय  के ये हिस्से,  
पलो की मानिंद फिसलने लगे है।  
यादो की स्याही बिखरी जाए  ....
धुंधलाने  गए तब, शामों  के साये  ..

नानी का आँचल, पकड़कर ये किस्से 
परियों के देशो में पलने लगे है 
बनके सुनहरे ख्वाबों सा पलकों में आये 
धुंधलाने  गए तब, शामों  के साये  ..

नीले से अम्बर के फटे से ये खिस्से 
तारे भी इनसे अब गिरने लगे है 
चंदा सब को संजोने यूँ आये 
धुंधलाने  गए तब, शामों  के साये  ..

31 July 2015

तो दिल क्या करे ?




जब खुद दिल ही दिल का  साथ न दे, 
तो  दिल क्या करे ?
समझ में आये ना ,
 जीए या मरे ??

यहाँ चलूँ या वहाँ रुकूँ ?
कदम मेरे,
 यूँ रुक रुक कर फिर से   चले 
तो दिल क्या करे ?

दिन बंजारा, दिन भर चले। 
पर रात   की पलके
सुबह तक भी  न  खुले, 
तो दिल क्या करे ?

कुछ ख्वाब चुने, कुछ  ख्वाब बुने।  
युहीं आँखों में 
ख्वाबो का दिया जले, 
तो दिल क्या करे ?


तुझ संग जियूँ ,तुझ संग मरू। 
दिल ये जो मेरा 
बस तुझ पे मरे ,
तो हम  क्या करे ?






22 July 2015

हम यूँ बहकने लगे


होंठ  शबनमी  रातो के
हो गये  है  नम ,
मेरी आँखे, तेरी आँखो से
बाते कर रही सनम।

फ़ासले दरमियाँ अब
मिटाओ भी  दो तुम
हम मे तुम, तुम मे हम
आओ  आज हो जाए गुम।

रेत की तरह हम भी
फिसलने लगे
लो थाम  लो  हमे
हम यूँ बहकने लगे।


पत्थर के सनम

वो कहते है  -सुनो!
हम है, 
पत्थर के सनम !
कुछ न कहते है, 
 कुछ न सुनते है, 
इस पत्थर की 
दुनिया में हम भी रहते है !

सुनो, 
न उम्मीद लगाना  
हमसे कोई !
न सजाना हमसे 
सपना कोई !
इस जहाँ में 
न खुशियाँ है न ग़म  !
हमसे मिलकर 
हो जाओगे तुम भी
पत्थर के सनम !


हमने  कहा   -सुनो ,
वो जो पत्थर है,
उन्हें  पिघलते
देखा है हमने ! 
कितने अंधियारे हो, 
दियो को जलते 
देखा है हमने !

तो क्या, 
जो तुम पत्थर के हुए?
यूँ भी  हर मंदिर में ,
पत्थर के खुदा 
रहते है 
सुनो अब तूम
मेरे मन मंदिर के 
अब से 
तुम ख़ुदाया हुए। 


15 July 2015

बन गया है तू मेरे जीने की वजह ...

 

ये क्या हुआ है ?
ये क्यों हुआ है "
बस इतना  पता है
बन गया है तू  ही
मेरे  जीने की वजह।

 रात चांदनी हो
फिर  सांवली सुबह हो
मुझपे, हँसने  लगे है
फूल  यूँ ही बेवजह  ।

आ भी जाओ हमदम
राह तक -तक, मैं हारी
जाऊँ तुम पे, वारी वारी
मुझको दो न यूँ तुम, सज़ा।

बन गया है तू,
हाँ, हाँ ,बन गया है तू,
मेरे  जीने की वजह।

12 July 2015

आ चल, ऐ ज़िन्दगी -अब हम चले




जब तू टूट कर न टुटे
तू न ज़िन्दगी से रूठे


हार हार कर तू 
एक बार फिर से जीते 

राह में हो काँटे फिर भी 
तू ख़ुशियाँ सबको बांटे 

आ चल, ऐ ज़िन्दगी 
आ फिर से, अब हम चले 
अब हम न रुके
बस चलते रहे 




.......

8 July 2015

हर हसीं शाम के बाद, एक रात हुई



 हर हसीं शाम के बाद,  एक रात हुई
हर मुलाकात के बाद, तेरी ही बात हुई।

माना के तेरे दर पे, न चर्चे मेरे होंगे, 
मेरे दर पे हर एक बार तेरी ही बात हुई।

देख ली मैंने भी खुशियाँ,  ज़माने भर की
ज़िन्दगी ये  तो खुशनुमा बस,  तेरे ही साथ हुई।









6 July 2015

आग, पानी में लगा दो ना।


मेरी बेपनाह चाहत के ये
राज़ तुम भी सुन लो ना।
आओ मेरे संग मिलकर कुछ
 ख़्वाब तुम भी बुन  लो ना।

पानियों ने लिखे है जो
हवाओं ने छेड़े है जो
गीत अपनी चाहत के
आओ तुम भी सुन लो ना।

रंगो से बिखरे हुए  जो,
ख़ुश्बुओ से महके  हुए वो ,
फूल अपनी चाहत के
तुम संग मेरे चुन लो ना।

बारिशों से  भीगी  है जो ,
बूंदे  गीली  गीली  सी ,
आओ दहकती  बूंदो   से तुम,
आग, पानी में लगा दो ना।