15 March 2024

एक धुन

 एक धुन सदियों  से

गुनगुनाती तुझे

वो है गाती तुझे

सुनाती है तुझे...

एक धुन सदियों  से

गुनगुनाती तुझे

वो है गाती तुझे

सुनाती है तुझे...



वो धुन भंवरों ने है चुराई

जाने कैसे 

वो धुन यूं बारिशों में खनखनाई

जाने कैसे 

इस हवा में सुर छिपे है 

बूंदों में स्वर बुने है 

बहारें बोलती है 

किनारे डोलती है

राज़ दिल में जो छिपे है

आंखों से वो खोलती है 

इस देहरी से उस

दहलीज पे बुलाती है तुझे

इश्क ही बस ज़िंदगी है 

ये बताती है मुझे 










13 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" रविवार 17 मार्च 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" रविवार 17 मार्च 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

Anonymous said...

आभार यशोदा जी
दिल से

Sunil said...

वाह
बेहद मर्म स्पर्शी रचना

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर

हरीश कुमार said...

बहुत सुंदर

आलोक सिन्हा said...

बहुत सुन्दर

Onkar said...

सुंदर रचना

Onkar said...

बहुत सुंदर रचना

शुभा said...




वाह!बहुत खूब!

विश्वमोहन said...

सुंदर!

विश्वमोहन said...

सुंदर!

Sandhya Rathore Prasad said...

आप सभी का हृदय पूर्वक आभार