24 March 2026

शर्माइन का लड़का और मिश्राइन की लड़की

 




खुसर पुसर कुछ इधर उधर की 

बात मिली जाने किधर किधर की 

पर अफवाहें  कुछ और कहे

कुछ और ही बाणी बोले 

शर्मा जी  के छोकरे  ने

कोई कांड किया हौले हौले

मिश्राइन की छोकरी से

ली आँख लड़ा  हौले हौले 



सबको पता है सबको खबर है

शर्माइन का बड़ा सा घर है

घर उसके नौकर चाकर है 

बगल में मिश्राएन का घर है

पर 

मिश्राइन की लड़की से वो 

सीधे मुँह न बोले 

पर इन बच्चों में जाने कैसे

 इश्क़ हुआ हौले हौले



दिखने में लड़का सुपरस्टार है 

अच्छा  है और समझदार है।

फ़ौज में अफ़सर बहुत बड़ा है 

यहीं पे सारा ही लफड़ा है 

मिश्राइन को फ़ौजी धुरंधर 

भाये नहीं एक तोले 

और लड़के लड़की की कहानी

खाए रही हिचकोले 


लड़की भी तो एक नंबर  है 

दिखने में कितनी सुंदर है

कमसिन कोमल काया उसकी

मोती झरते जब वो हंसती 

मिश्राइन अपनी तिजोरी 

कभी न लेकिन खोले 

और शर्माइन तो बेटे को

बस सोने चांदी में  तोले 




और एक दिन वो 

फ़िर दिन भी आया 

इश्क़ ने अपना 

रंग दिखलाया 

शादी की अर्जी भी धर दी 

कोरट मैरिज दोनों ने कर ली

शर्मा जी मिश्रा जी तो अब 

 क्या तो    मुँह भी खोले 

पर शर्माइन मिश्राइन में इक 

युद्ध हुआ और खूब चले बम गोले 



लड़का लड़की फिर 

घर को आये 

मान मनौव्वल खूब चलाये 

मिश्रा माने 

मिश्राइन रूठ गई 

शर्मा जी तो कुछ न बोले

शर्माइन तो छत से कूद गई

साँस रुकी एक पल को सबकी 

कहीं ये दुनिया से तो न सटकी 

डॉक्टर आये नब्ज़ टटोले 

जिंदा है यें 

ले  गहरी साँस  फ़िर  बोले



शर्माइन की

इक टाँग टूट गई 

शादी हुई पर शादी टूट गई 

बच्चों की तो

हाय किस्मत ही फूट गई

कोरट में अब दिन मास वे डोले

डाइवोर्स की  फाइलें  खोले 



दूर से देखे एक दूजे को 

लेकिन  कुछ  न बोले

हुआ ये क्या क्यों और कैसे

कोई तो भेद खोले

बैरी जग क्यों आड़े आया

या कुंडली  पे

साढ़े साती छाया 

पास तो है पर

साथ नहीं है 

जीने की अब दरकार नहीं है 

किसको दिखाये वो ज़ख्म फफोले 

कैसे पी ले 

वो जहर जो अपनों ने घोले 


जग कहता  तुम प्यार न करना 

जो प्यार करो तो 

इकरार न करना

किस्मत के होते  

ये खेल निराले 

अपनों को देखे या 

कोई इश्क़ संभाले ?

इश्क वो मौसम है कि जिसमें 

बेमौसम बरसातें हो ले 

सर मुंडाते ही इश्क में 

पड़ते सर पे ओले 

पड़ते है सर पे ओले 




























मेरा सैयां

 



ठेठ सा देहाती सैयां 

इंग्लिस बोले गड़बड़ गड़बड़ 

पहन के धोती और  एक कोटी 

बंदूक चलाये धड़धड़ धड़धड़


रोज उठे अखाड़ा जाये 

नदी तालाब में वो नहाए 

कांसे की थाली में खावे 

लस्सी ग्लास भर गटक वो जाए 

स्वैग वाला सैयाँ मेरा 

हुक्का पावे गुड़गुड़ गुड़गुड़ 



शहर की उसको रीत न भावे 

पिज़्ज़ा बर्गर वो न खावे 

मॉल  में वो टशन दिखावे 

शहर के छोरे उसे देखे जावे 

स्टाइल वाला सैयाँ मेरा 

थार चलावे सर सर सर सर 



मैं छोरी फ़ैशन की मारी 

गई मैं उसपे वारी वारी 

सैयाँ वो हो बैठा मेरा

मैं बन बैठी सजनी प्यारी 

स्वैग वाला सैया मेरा 

अब चैन न पावे पलभर पलभर 




23 March 2026

तेरी जमी का टुकड़ा

 





वो जो टुकड़ा ,

अपनी  ज़मीं का,

तूने मुझको दिया था ...

उस टुकड़े में 

शाम  ढले 

इस रात की जानिब,

यादों के जंगल पलते है 

बीती बातों  के  कुछ जुगनू 

इस जंगल में बुझते जलते है 



उस टुकड़े से  जाने कैसे 

लम्हा  कोई 

रिसता  है

खंजर सा वो लम्हा 

दिल में 

आ कर  चुभता है 

टीस उठे  और 

पीड़ जगे

 दिन ऐसे ये  गुज़रते है 

भूले वादों के  कुछ जुगनू 

इस जंगल में बुझते जलते है 



उस टुकड़े से 

 गहरा हरा सा

और नीला  रंग  

टपकता है 

पलकों पे रुक जाए

तो

कभी होंठों पे 

ठहरता है 

ज़ख्म हरा हो 

 या  हो नीला 

ज़ख्म कहां  ये भरते है 

शिकवों के कुछ जुगनू 

इस जंगल में बुझते जलते है 



जुबां ये फीकी फीकी लागे

 



जुबां  ये फीकी फीकी लागे 

तेरे नाम के बिना 

मुझे कुछ सूझे न बूझे न 

तेरे नाम के बिना 


तेरा नाम मेरी पूंजी 

मेरे रोम रोम गूँजी 

तेरी  यादें प्यारी प्यारी

मैं तो  इनमें ही रीता 

इनमें जीवन ये बीता 

इसक की लगी ये  बीमारी 

जपूं तेरा नाम नाम दिन रात 

न जीना तेरे बिना 

मुझे कुछ सूझे न बूझे न 

तेरे नाम के बिना 



तेरा नाम मेरी काया 

तू  मुझ में समाया 

चढ़ गई तेरी ही खुमारी 

तू  डोर मैं पतंग 

 हुआ मस्त मैं मलंग 

कैसी दिल की है  ऐयारी 

पुकारूं सुबह शाम तेरा नाम 

न जीना तेरे बिना 

मुझे कुछ सूझे न बूझे न 

तेरे नाम के बिना






17 March 2026

पथरीली राहों पे

 


 पथरीली राहों पे 

निकल पड़ी मैं तो  साथ तुम्हारे 

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे 



अब मुझको हो फिकर ही कैसी

ग़म हो आखिर किस बात का

खुशियां है अब दामन में मेरे

उड़ती फिरूँ मैं साथ तुम्हारे

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे




कोई सफ़र हो कोई डगर हो

धूप से अपना क्या वास्ता 

छाँव छाँव राहें हैं मेरी 

बादल पे है पाँव हमारे 

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे



कोई लम्हा  सदियों सा होगा

या सदियां  खुद  लम्हे सी हो 

हर लम्हा हर पल को जिऊं मैं 

रुक गये जैसे वक़्त के धारे 

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे





16 March 2026

आहिस्ता बोलिये कहीं version २

 


आहिस्ता बोलिये कहीं 

सुन ले n  ये फ़िराक़ ए दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल



तुमसे ये नज़रें  क्यूँ 

उलझती रहीं है 

गुत्थी है क्या  ये 

सुलझती नहीं है

रिश्तों के धागे है 

दिल ने जो बाँधे है 

आहिस्ता खोलिए इन्हें

कि बिखरे न ये फिराक दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल



ग़ज़लें और नज्में तुम 

लिखते  रहे हो 

किस्से कहानी तुम 

गढ़ते रहे हो

लफ़्ज़ों की काया है

इनकी इक माया है

तोल के बोलिये इन्हें

 टूटे न ले ये फिराक दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल