17 March 2026

पथरीली राहों पे

 


 पथरीली राहों पे 

निकल पड़ी मैं तो  साथ तुम्हारे 

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे 



अब मुझको हो फिकर ही कैसी

ग़म हो आखिर किस बात का

खुशियां है अब दामन में मेरे

उड़ती फिरूँ मैं साथ तुम्हारे

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे




कोई सफ़र हो कोई डगर हो

धूप से अपना क्या वास्ता 

छाँव छाँव राहें हैं मेरी 

बादल पे है पाँव हमारे 

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे



कोई लम्हा  सदियों सा होगा

या सदियां  खुद  लम्हे सी हो 

हर लम्हा हर पल को जिऊं मैं 

रुक गये जैसे वक़्त के धारे 

मंज़िल मंज़िल मुझको पुकारे 

मैं  न सुनूँ मैं हूँ साथ तुम्हारे





16 March 2026

आहिस्ता बोलिये कहीं version २

 


आहिस्ता बोलिये कहीं 

सुन ले n  ये फ़िराक़ ए दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल



तुमसे ये नज़रें  क्यूँ 

उलझती रहीं है 

गुत्थी है क्या  ये 

सुलझती नहीं है

रिश्तों के धागे है 

दिल ने जो बाँधे है 

आहिस्ता खोलिए इन्हें

कि बिखरे न ये फिराक दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल



ग़ज़लें और नज्में तुम 

लिखते  रहे हो 

किस्से कहानी तुम 

गढ़ते रहे हो

लफ़्ज़ों की काया है

इनकी इक माया है

तोल के बोलिये इन्हें

 टूटे न ले ये फिराक दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल








आहिस्ता बोलिये कहीं version १




आहिस्ता बोलिये कहीं 

सुन ले न ये फ़िराक़ दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल 


खामोश कुछ ये  तन्हाइयां है

कुछ राज है कुछ निशानियां 

लब तो है बिल्कुल खामोश से

 नज़रों  से होती बयानियां 

 शोखी से देखिये कहीं 

बहके न ये फ़िराक़ दिल

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल



नाज़ुक बड़ा है हाल-ए-दिल

 नाशाद है बीमारे दिल

परछाइयां की आहट  से 

बेचैन है बेहाल दिल 

नज़रें ज़रा संभालिए 

नज़रे  जाये कहीं न मिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल
















15 March 2026

पुकारो मुझे




पुकारो मुझे 

कि फ़िर 

लौट आऊँ शायद

वहाँ से ,जहाँ से 

कोई आता नहीं है 


कोई साँस बाक़ी 

होगी ही शायद 

धता बता  मौत को यूँ  

ऐसे ही 

कोई आता नहीं है 


कोई ऋण 

कभी का 

कुछ बाक़ी ही होगा 

ये जीवन 

यूँ ही कोई पाता नहीं है


तुम मिले हो सफ़र में

तो वज़ह होगी कोई

वरना 

 शरीक ए सफ़र 

यूँ ही कोई होता नही है

16 February 2026

कारीगरी इस दिल की



कारीगरी इस दिल की 
सुनकर  भी क्या तुम करोगे 
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ...हम सी ही  आहे भरोगे 

कैसे बताए 
कितना था नादां 
कितना था सीधा साफ दिल 
बातें सब सुनता था 
जिरह न करता था 
यूँ तो बड़ा था  अशराफ दिल 
नादान दिल  की   नादान बातें 
जानोगे ,  क्या ही करोगे ?
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ...हम सी  ही आहे भरोगे


दिन यूं ही कटते थे 
हम और दिल खटते थे 
फ़िर राहों में कोई गया यूँ मिल 
धक धक यूँ धड़का 
रह रह के तड़पा 
उनके लिए  गुस्ताख दिल 
हिज्र के मौसम में यादों के खंजर
कब तक आखिर सहोगे 
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ...हम सी  ही आहे भरोगे


आंखें न कह पाई 
कहे बिन न रह पाई 
बोले  भी  कैसे मुसाफ़ दिल 
 वो भी तो बोले न 
जस्बात  खोलें न 
कैसे है वो इल्ताफ़ दिल 
उनके सितम  दिल  में  कब तक छुपाये 
कैसे बयाँ भी  करोगे
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम.... हम सी  ही आहे भरोगे


कैसे बताएं 
कि इश्क़ निकम्मा
और हम   तो हुए इसराफ दिल
ख़ुद को ही खोया 
और उनको  न पाया 
मांग रहा इंसाफ दिल 
इश्क़ कभी भी उनको नहीं था 
अब उम्मीद क्या ही करोगे 
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ....हम सी  आहे भरोगे






• अशराफ- शरीफ़ 
• मुसाफ़- शुद्ध 
• इलताफ -मेहरबानी 
• इसराफ -fizulkharchi 











 



 

15 February 2026

तुम सांझ मेरी रातों के



तुम सांझ मेरी रातों के 

दिन के सवेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे 


न तो तेरी ख्वाहिश ही

न है ख़्वाब तेरा

जाने क्यों अधूरा है

इंतज़ार मेरा

आँखे भी तो  तकती है 

राहें  तेरी  ऐसे

बिछ जाएं राहों में 

उम्र भर को जैसे 

नींदों  में भी तेरी  ही

यादों ने डालें  डेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे



फ़र्श पे मेरा घर है 

अर्श पे है तेरा

जीना नहीं कोई 

बस चुप सा इक अंधेरा 

साँसें फिर भी तकती है

राहें तेरी ऐसे

साँसों में समाएंगी 

साँस साँस जैसे

धड़कनों ने बांधे है 

धड़कनों के घेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे



तुम सांझ मेरी रातों के 

दिन के सवेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे




 

10 February 2026

इस रिश्ते की बात अलग है

  



 

मेरा  तुझसे

तेरा मुझसे

इस रिश्ते  की बात अलग है 



कितना मैंने  

तुमको जाना 

जितना जाना 

अपना माना 

वो जो मुझसे 

जुड़ के जुड़ा है 

उस  हिस्से की बात अलग है 



कब सोचा कि

 तुमको पा लूँ 

कब चाहा तुमको 

मैं मना लूं 

चाहे मैं 

छोटा सा किस्सा 

इस किस्से बात अलग है 



धड़कन कब से 

बोल रही है 

आँखे कुछ कुछ 

तोल रही है 

होंठों ने होंठो पे  लिक्खा

उस लिक्खे की बात  अलग है 



हिज्र के तो है 

ढाई आखर 

वस्ल में भी 

है ढाई अक्षर 

 हिज्र वस्ल है इश्क़ के हिज्जे 

हर हिज्जे की बात अलग है

31 January 2026

परिवार कीमती पूंजी

 श्रीमती  बोली 

अजी  सुनते हो 

मिश्राइन के घर से 

न्योता आया है 

टिन्नी के जन्मदिन पे 

सपरिवार बुलवाया है 


श्रीमान बोले 

है बच्चे का जन्मदिन 

बेबो गुनगुन यशु को 

भिजवा दीजे 

सौ पचास में  

मामला सुलटा लीजे


क्या कहते हो !!

श्रीमती दहाड़ी 

दिखाएंगे फिर किसको 

अपनी महंगी 

बनारसी वो साड़ी !


नेकलेस जो सोने का 

 मां ने  भिजवाया है 

 खास इसी दिन के लिए  तो 

 मंगवाया है 


ले louis vitton का बटुआ 

लगा rayban का चश्मा 

छिड़क gucci का परफ्यूम 

पहन रोलेक्स की घड़ी 

पहन बनारसी 

लाल पीली वो साड़ी 

इतराएंगी हम 

निहारेंगी हमको फिर 

वूमेनवा  निगोड़ी  सारी 


मिसेज दुबे भी तो 

बड़ी इठलाएंगी 

गाउन पहिन 

जबरन  शर्माएंगी!

शर्माइन की तो है

अलग ही माया है  

सोचती है रूप उनका सा 

न किसी ने पाया 


मिसेज झा जो है 

पाउडर का डिब्बा 

बात करो तो  अब्बा 

डब्बा छब्बा 

कहती  हमे वो 

सुनिए संध्या जी 

कहने को हम है 

 एक उम्र है जी

आप तो हो 

छोटी और मोटी 

खाई थी बोलों

किस आटे की रोटी!!


सोसाइटी की महिलाएं

हर वक्त  भरती दम है 

सुनिए संध्या जी  

चारों तरफ बस

हम ही हम है 

बस  आप ही एक है 

 जो पानी कम है !!


 

किस किस की बाते 

अब तुमको  बताए 

कब कब और कितने 

कैसे कैसे ज़ख्म  है खाए 


पहले हमको तुम 

सेट डायमंड का बनवा  दो

जौहरी से कह के  

मूंगा मोती के   सेट 

भिजवा दो

दो कांजी सिल्क साड़ी 

एक पटोला 

एक पोचम पल्ली 

मंगवा दो 

 तीन  सैंडल 

दो नई  पश्मीना  शॉलें 

दिलवा दो



सुनो श्रीमान जी 

ये सब दिलाओ 

घर में अपने 

तब ही प्रवेश पाओ 



श्रीमान ये सुन 

बस जड़वत से हो गए 

उनके होश फाख्ता 

कौवे तोते उड़ गए 

" हे राम जी 

 हम तो लुट  गए "

जहां खड़े थे 

वहीं वो पड़ गए 

फिर  तो उनका 

बीपी भी  गिर गया 

बदन टेढ़ा हुआ और  

शुगर भी बढ़ गया 

सांसे  तो धौकनी  सी 

तेज हो गई 

देख  श्रीमान की हालत 

श्रीमती भी 

पसीने से  लबरेज़ हो गई


फिर बवाल मच  गया

अफरा तफ़री हो गई

श्रीमान  जी को फ़िर 

एम्बुलेंस  ही  ले गई 

आईसीयू में 

ही फिर खाट लग गई 


क्या बताए  फिर कैसे 

बीते  चार दिन वो 


जीना दुश्वार हो गया 

पैसा पानी सा बह गया 

श्रीमान जी के दिल में 

एक स्टेंट भी लग गया 

अब तो सांस सांस पे 

बस टैक्स लग गया 




epilogue 

उपसंहार:



श्रीमती जी बोली 

हमें माफ कीजिए 

दिल साफ़ कीजिए 

दिखावे के चक्कर में 

हम बेसबब ही आ गए

जान आपकी 

दांव पे लगा गए 

अब से हमने सीख ले ली 

परिवार ही है 

सबसे कीमती पूंजी