16 February 2026

कारीगरी इस दिल की


कारीगरी इस दिल की 
सुनकर  भी क्या तुम करोगे 
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ...हम सी  आहे भरोगे 

कैसे बताए 
कितना था नादां 
कितना था सीधा साफ दिल 
बातें सब सुनता था 
जिरह न करता था 
यूँ तो बड़ा था  अशराफ दिल 
नादान दिल  की   नादान बातें 
जानोगे ,  क्या ही करोगे ?
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ...हम सी  आहे भरोगे


दिन यूं ही कटते थे 
हम और दिल खटते थे 
फ़िर राहों में कोई गया यूँ मिल 
धक धक यूँ धड़का 
रह रह के तड़पा 
उनके लिए  गुस्ताख दिल 
हिज्र के मौसम में यादों के खंजर
कब तक आखिर सहोगे 
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम ...हम सी  आहे भरोगे


आंखें न कह पाई 
कहे बिन न रह पाई 
बोले  भी  कैसे मुसाफ़ दिल 
 वो भी तो बोले न 
जस्बात  खोलें न 
कैसे है वो इल्ताफ़ दिल 
उनके सितम  दिल  में  कब तक छुपाये 
बयाँ भी तो कैसे करोगे
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम हम सी  आहे भरोगे


कैसे बताएं 
कि इश्क़ निकम्मा
और हम  हुए इसराफ दिल
ख़ुद को ही खोया 
और उनको न पाया 
मांग रहा इंसाफ दिल 
इश्क़ कभी भी उनको नहीं था 
अब उम्मीद क्या ही करोगे 
हँस दोगे रो दोगे 
और तुम हम सी  आहे भरोगे






• अशराफ- शरीफ़ 
• मुसाफ़- शुद्ध 
• इलताफ -मेहरबानी 
• इसराफ -fizulkharchi 











 



 

15 February 2026

तुम सांझ मेरी रातों के



तुम सांझ मेरी रातों के 

दिन के सवेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे 


न तो तेरी ख्वाहिश ही

न है ख़्वाब तेरा

जाने क्यों अधूरा है

इंतज़ार मेरा

आँखे भी तो  तकती है 

राहें  तेरी  ऐसे

बिछ जाएंगी राहों में 

ताउम्र भर ये जैसे 

नींदों  में भी तेरी  ही

यादों ने डालें  डेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे



फ़र्श पे मेरा घर है 

अर्श पे है तेरा

जीना नहीं कोई 

बस चुप सा इक अंधेरा 

साँसें फिर भी तकती है

राहें तेरी ऐसे

साँसों में समाएंगी 

साँस साँस जैसे

धड़कनों ने बांधे है 

धड़कनों के घेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे



तुम सांझ मेरी रातों के 

दिन के सवेरे 

जाने क्यों ये लगता है 

बिन फेरे हम तेरे




 

10 February 2026

इस रिश्ते की बात अलग है

  



 

मेरा  तुझसे

तेरा मुझसे

इस रिश्ते  की बात अलग है 



कितना मैंने  

तुमको जाना 

जितना जाना 

अपना माना 

वो जो मुझसे 

जुड़ के जुड़ा है 

उस  हिस्से की बात अलग है 



कब सोचा कि

 तुमको पा लूँ 

कब चाहा तुमको 

मैं मना लूं 

चाहे मैं 

छोटा सा किस्सा 

इस किस्से बात अलग है 



धड़कन कब से 

बोल रही है 

आँखे कुछ कुछ 

तोल रही है 

होंठों ने होंठो पे  लिक्खा

उस लिक्खे की बात  अलग है 



हिज्र के तो है 

ढाई आखर 

वस्ल में भी 

है ढाई अक्षर 

 हिज्र वस्ल है इश्क़ के हिज्जे 

हर हिज्जे की बात अलग है

31 January 2026

परिवार कीमती पूंजी

 श्रीमती  बोली 

अजी  सुनते हो 

मिश्राइन के घर से 

न्योता आया है 

टिन्नी के जन्मदिन पे 

सपरिवार बुलवाया है 


श्रीमान बोले 

है बच्चे का जन्मदिन 

बेबो गुनगुन यशु को 

भिजवा दीजे 

सौ पचास में  

मामला सुलटा लीजे


क्या कहते हो !!

श्रीमती दहाड़ी 

दिखाएंगे फिर किसको 

अपनी महंगी 

बनारसी वो साड़ी !


नेकलेस जो सोने का 

 मां ने  भिजवाया है 

 खास इसी दिन के लिए  तो 

 मंगवाया है 


ले louis vitton का बटुआ 

लगा rayban का चश्मा 

छिड़क gucci का परफ्यूम 

पहन रोलेक्स की घड़ी 

पहन बनारसी 

लाल पीली वो साड़ी 

इतराएंगी हम 

निहारेंगी हमको फिर 

वूमेनवा  निगोड़ी  सारी 


मिसेज दुबे भी तो 

बड़ी इठलाएंगी 

गाउन पहिन 

जबरन  शर्माएंगी!

शर्माइन की तो है

अलग ही माया है  

सोचती है रूप उनका सा 

न किसी ने पाया 


मिसेज झा जो है 

पाउडर का डिब्बा 

बात करो तो  अब्बा 

डब्बा छब्बा 

कहती  हमे वो 

सुनिए संध्या जी 

कहने को हम है 

 एक उम्र है जी

आप तो हो 

छोटी और मोटी 

खाई थी बोलों

किस आटे की रोटी!!


सोसाइटी की महिलाएं

हर वक्त  भरती दम है 

सुनिए संध्या जी  

चारों तरफ बस

हम ही हम है 

बस  आप ही एक है 

 जो पानी कम है !!


 

किस किस की बाते 

अब तुमको  बताए 

कब कब और कितने 

कैसे कैसे ज़ख्म  है खाए 


पहले हमको तुम 

सेट डायमंड का बनवा  दो

जौहरी से कह के  

मूंगा मोती के   सेट 

भिजवा दो

दो कांजी सिल्क साड़ी 

एक पटोला 

एक पोचम पल्ली 

मंगवा दो 

 तीन  सैंडल 

दो नई  पश्मीना  शॉलें 

दिलवा दो



सुनो श्रीमान जी 

ये सब दिलाओ 

घर में अपने 

तब ही प्रवेश पाओ 



श्रीमान ये सुन 

बस जड़वत से हो गए 

उनके होश फाख्ता 

कौवे तोते उड़ गए 

" हे राम जी 

 हम तो लुट  गए "

जहां खड़े थे 

वहीं वो पड़ गए 

फिर  तो उनका 

बीपी भी  गिर गया 

बदन टेढ़ा हुआ और  

शुगर भी बढ़ गया 

सांसे  तो धौकनी  सी 

तेज हो गई 

देख  श्रीमान की हालत 

श्रीमती भी 

पसीने से  लबरेज़ हो गई


फिर बवाल मच  गया

अफरा तफ़री हो गई

श्रीमान  जी को फ़िर 

एम्बुलेंस  ही  ले गई 

आईसीयू में 

ही फिर खाट लग गई 


क्या बताए  फिर कैसे 

बीते  चार दिन वो 


जीना दुश्वार हो गया 

पैसा पानी सा बह गया 

श्रीमान जी के दिल में 

एक स्टेंट भी लग गया 

अब तो सांस सांस पे 

बस टैक्स लग गया 




epilogue 

उपसंहार:



श्रीमती जी बोली 

हमें माफ कीजिए 

दिल साफ़ कीजिए 

दिखावे के चक्कर में 

हम बेसबब ही आ गए

जान आपकी 

दांव पे लगा गए 

अब से हमने सीख ले ली 

परिवार ही है 

सबसे कीमती पूंजी 













, पति जी तुम्हीं जीवन का सार

 श्रीमती  बोली 

अजी  सुनते हो 

मिश्राइन के घर से 

न्योता आया है 

टिन्नी के जन्मदिन पे 

सपरिवार बुलवाया है 


श्रीमान बोले 

है बच्चे का जन्मदिन 

चुन्नू मुन्नू को 

भिजवा दीजे 

सौ पचास में  

मामला सुलटा लीजे


क्या कहते हो !!

श्रीमती दहाड़ी 

दिखाएंगे फिर किसको 

अपनी महंगी 

बनारसी वो साड़ी !


नेकलेस जो सोने का 

 मां ने  भिजवाया है 

 खास इसी दिन के लिए  तो 

 मंगवाया है 


ले louis vitton का बटुआ 

लगा rayban का चश्मा 

छिड़क gucci का परफ्यूम 

पहन रोलेक्स की घड़ी 

पहन बनारसी 

लाल पीली वो साड़ी 

इतराएंगी हम 

निहारेंगी हमको फिर 

वूमेनवा  निगोड़ी  सारी 


मिसेज दुबे भी तो 

बड़ी इठलाएंगी 

गाउन पहिन 

जबरन  शर्माएंगी!

शर्माइन की तो है

अलग ही माया है  

सोचती है रूप उनका सा 

न किसी ने पाया 


मिसेज झा जो है 

पाउडर का डिब्बा 

बात करो तो  अब्बा 

डब्बा छब्बा 

कहती  हमे वो 

सुनिए संध्या जी 

कहने को हम है 

 एक उम्र है जी

आप तो हो 

छोटी और मोटी 

खाई थी बोलों

किस आटे की रोटी!!


सोसाइटी की महिलाएं

हर वक्त  भरती दम है 

सुनिए संध्या जी  

चारों तरफ बस

हम ही हम है 

बस  आप ही एक है 

 जो पानी कम है !!


 

किस किस की बाते 

अब तुमको  बताए 

कब कब और कितने 

कैसे कैसे ज़ख्म  है खाए 


पहले हमको तुम 

सेट डायमंड का बनवा  दो

जौहरी से कह के  

मूंगा मोती के   सेट 

भिजवा दो

दो कांजी सिल्क साड़ी 

एक पटोला 

एक पोचम पल्ली 

मंगवा दो 

 तीन  सैंडल 

दो नई  पश्मीना  शॉलें 

दिलवा दो



सुनो श्रीमान जी 

ये सब दिलाओ 

घर में अपने 

तब ही प्रवेश पाओ 



श्रीमान ये सुन 

बस जड़ से हो गए 

उनके होश फाख्ता 

कौवे तोते उड़ गए 

ऐसे तो हम लुट जाएंगे 

ये एक था बर्थडे 

अभी कितने आयेंगे 

क्या हर बार ऐसी 

फरमाइश होगी 

जेब की अपनी 

आजमाइश होगी 

कह देते है 

जो मिला है उससे 

करो निबाह 

वरना हम कर लेंगे 

दूसरा ब्याह 


श्रीमती बोली 

अजी जाने दीजे 

हम को ये सब 

नहीं चाहिए चीजें 

आप हमारे 

रूप श्रृंगार 

आप ही से है 

जीवन का सार

29 January 2026

वो रिश्ता

 क्या तुम कभी 

मुझे पढ़ते हो 

शब्द मेरे मुझ से ही 

छोटे छोटे  

भारी भरकम 

गोल मटोल 

मगर कहीं कहीं खुरदुरे

कहीं रुखे 

कहीं  कहीं नुकीले से है 

चुभ जाते है कई बार 

अनजाने  में अनचाहे से


कभी तो 

मामूली खरोचें लग आती है

तो कभी 

थोड़ी सी चोट लग आती है

मगर इस बार शायद 

नश्तर ही चुभ गया था

घाव ज्यादा ही रिस गया था 

कोमा में ही चला गया वो रिश्ता 

आज भी परे हूं 

समझने से 

कि ये रिश्ता जिंदा है भी 

या मर गया बरसो पहले


और ढो रही हूं मैं 

एक मरघट 

अपने कांधे पे 

कि बस 

मुखाग्नि ही देनी है 

इस मरे हुए रिश्ते को 


पर जाने क्यों 

कभी रुक रुक 

नब्ज़ टटोलती हूं 

ये जानते हुए कि 

वो मर चुका है 

पर उसका क्या करूं 

जो मुझमें जिंदा है अभी !!