17 June 2026

इश्क़ की गलियाँ version 2

 इश्क़ की कलियाँ 

जब से  खिली है

भँवरे सा मन  ये हुआ

खोया खोया 

बहका बहका 

पतंगे  के जैसे हुआ 

कि  ऐसी लगी धुन 

करने लगा है दिल 

गुनगुन गुनगुन 

गुनगुन गुनगुन गुन 



ओस की गीली

 गीली बूँदे 

अम्बर से छम छम  गिरे 

बावरा मन अब 

बस में नहीं है  

ठंडी सी आहे  भरे 

टिप टिप बरसे 

बदरा छुन छुन 

कि करने लगा है दिल 

रुमझुम रुमझुम 

रुमझुम रुमझुम झुम 


बालों की भीनी 

भीनी   खुशबू 

सांसो में ऐसे उलझे 

मोम बदन काँच है जैसे 

छूने से  टूटे पिघले 

ख़्वाब तुम्हारे हमको  पुकारे

ख्वाहिश शोर करे 

रागिनी जैसा इश्क़ हुआ 

कि दिल ये हुमहूम हुमहूम 

 हुमहुम हुमहूम करता यूँ फिरे 


कि दिल मेरा गुनगुन गुनगुन 

गुनगुन गुनगुन करता यूँ फ़िरे...


इश्क़ की कलियाँ

 इश्क़ की कलियाँ 

जब से  खिली है

भँवरे सा मन  ये हुआ

खोया खोया 

बहका बहका 

पतंगे  के जैसे हुआ

कि दिल ये गुनगुन गुनगुन 

गुनगुन गुनगुन करता यूँ फिरे 

कि दिल ये गुनगुन गुनगुन 

गुनगुन गुनगुन करता यूँ फ़िरे 


ओस की गीली गीली बूँदे 

अम्बर से छम से गिरे 

बावरा मन सजना को पुकारे 

ठंडी  सी आहे  भरे 

बारिश बारिश इश्क़ हुआ है

कि दिल ये रुमझुम रुमझुम 

रुमझुम रुमझुम करता यूँ फिरे 

दिल ये गुनगुन गुनगुन 

गुनगुन गुनगुन करता यूँ फ़िरे...


जूही की भीनी भीनी खुशबू  

अलकों से यूँ उलझे 

मोम हुआ ये जिस्म तो ऐसे 

छूने से ये पिघले 

ख़्वाब तुम्हारे हमको  पुकारे

ख्वाहिश शोर करे 

रागिनी जैसा इश्क़ हुआ 

कि दिल ये हुमहूम हुमहूम 

 हुमहुम हुमहूम करता यूँ फिरे 


कि दिल मेरा गुनगुन गुनगुन 

गुनगुन गुनगुन करता यूँ फ़िरे...


तेरी आँखों में अब ठौर है

 तेरे दिल 

तेरी आँखों में 

अब ठौर है 

तू ही जीने का मेरे 

नया तौर है 



क्या करूँ ...

बिन तेरे ...

दिन  गुज़रता नहीं 

अब तो आजा 

कि दिल अब 

संभलता नहीं ...

तेरी आदत तो जैसे 

अफ़ीमी सी है 

रात चढ़ती 

बढ़ता नशा और है 

तू जीने का 

नया तौर है



इश्क़ में तेरे 

हो गई मैं नई 

मैं थी क्या 

और क्या हो गई 

सामने तू मेरे 

और तेरे संग मैं 

रच गई बस गई 

तेरे रंग मैं 

दिल है दिल 

दिल के मिलने का ये दौर है 

नया दौर है 

तू ही जीने का मेरे 

नया तौर है


ह्म्म्म अहा 

हम्मम अहा 






जाने देना version 2

 जाने दे 

टूटे टूटे  धागों को 

रूठे रूठे  ख्वाबों को

भूले बिसरे वादों को

जाने दे 

जाने दे ...जाने दे 

जाने दे ...जाने दे 



पंख जो टूटे थे कभी 

डंक जो चुभे थे  सभी 

घाव जो हरे है अभी 

उन ज़ख्मों को 

भर जाने दे 

सूखे मन को 

हरियाने दे

मुझको घर.....जाने दे....



सीली सीली यादें हैं कई 

बातें अब  आई और गई

रीतें हर रात   क्यों नई 

बीती बातों को 

भूल जाने दे

रीती आँखों को 

सूख जाने दे

मुझको घर.....जाने दे....

जाने दे ...

अहा हा... ह्म्मह्म 

जाने दे 


जाने देना

 जाने देना...

जैसे पेड़ों से हो कहना ,

कि तोड़ दे  वो 

सूखी शाखें 

गिरा दे वो 

पीले सूखे भूरे पत्ते 

पतझड़ के आ जाने पे 


​जाने देना...

जैसे बहती हवाओं से

हो कहना 



भूल जाएं वो साँस लेना 

​जाने देना...

जैसे अम्बर से कहना हो,

कि भूल जाए उस ज़मीं को जो उसके तले है!

​मगर फिर भी... जाने देना ही तो है,

ज़िंदगी को यह मौक़ा देना कि वह—

नूतन हो सके,

पुनर्जीवित हो सके,

पुनर्जन्म ले सके,

और नव-सृजित हो सके!

​तो आओ...

अब जाने भी दो,

3 June 2026

दिल बेकरार है


बेकरार है...

ये दिल क्यों ..

बेकरार है...

कि  तेरा इंतज़ार है 

कि तेरा ही ख़ुमार है ...

दिल मेरा बस में अब नहीं 

कि हुआ उसे तुमसे प्यार है 

उसे बस तुमसे प्यार है 

प्यार है 

प्यार है,....



हवाओं के पर लिये फिरूँ 

मैं तो अम्बर पे अब चलूँ 

चांद की चाँदनी मैं लिए 

तारों सा झिलमिल  करूँ 

रातें दिन हो गई 

हर पल छिन हो गई 

कि मैं अब मैं हूँ नहीं 

तुझमें हूँ खो गई

हाँ.... करार है 

मुझको ऐतबार है

दिल में तू ही तू  है बसा 

दिल ये  तेरा बीमार है

मुझे बस तुझसे प्यार है 

प्यार है 

प्यार है 

29 May 2026

तुझको पाने की है ख्वाहिश

 



 

तुझको पाने की 

है ख्वाइश 

ख्वाबों से है 

गुजारिश

मेरे सपनों में  बसा हो 

तू ही तू 

तू ही दिल की...

धड़कनो की ...

है आरज़ू....


नुक्कड़ पे चाय पीते 

सिगरेट के कश लगाते 

धीमे धीमे मुस्कुराते 

गलियों में  देखा तुझको 

मैंने तो आते जाते 

इक पल को यूँ लगा था

जिसको सपनों में था देखा 

वो सलोना सा सजन था 

तू ही तू ...

इस दिल की तू है 

जुस्तजू 

तू ही धड़कन 

तू दिल की आरजू


अब तो दिन हो चाहे रातें 

सब करते है तेरी बातें 

तुझे गाते गुनगुनाते 

ये खिड़की ये अहाते 

फूलों से पत्तियों से 

हर शय से तेरे नाते 

देखूँ जब जब चांद तारे 

कहते है अब  वो सारे

मेरी धरती का गगन है 

तू ही तू 

इक दफ़ा सुन ले 

दिल की गुफ्तगू 

तू ही धड़कन 

तू दिल की आरजू 



चली हूँ मैं बन ठन के

 ओ 

मैं तो जींस पवा के

सैंडल पा के 

चली हूं यूं बन ठन के 

नजरें देखें इसकी उसकी 

जले भुने से मन से 



फोन मेरा है सबसे महंगा 

आँखो पे शेड्स का पहरा 

परफ्यूम मेरी है gucci वाली 

कानों में है प्लैटिनम बाली

डेट करें जो लड़का मुझको 

वो हो warren buffett का  साला 

रंग सुनहरा 

आँखो  में कजरा 

कंगन में हीरे चमके 

नज़रे देखें इसकी उसकी

निकलूँ जब बन ठन के



अंदाज़ मेरा ये सबसे अलग है

और स्वैग है celeb वाला 

कपड़े सब डिजाइनर मेरे

ब्रांड है पेरिस वाला 

कॉस्मेटिक सब  मेरे विदेशी  मेरे 

पानी भी kangen वाला 

महलों में डेरा 

कड़ा है पहरा 

रानी से मेरे नखरें 

नज़रे देखें इसकी उसकी 

जब रहूँ मैं क्वीन सी बनके 




सोशल मीडिया की  दीवा  जैसे

यूट्यूब इंस्टा की मैं बाला 

लाखों है फॉलोअर मेरे 

हर अदा ने ट्रेंड सेट कर डाला 

लाखों दिल की धड़कन मैं

जपें कई बस 

मेरे नाम की माला

हर जुबां पे ठहरा 

नाम ये मेरा 

हर ओर मेरे है चर्चे 

जले भुने सब आस पड़ोसी 

मेरे पैसों और मेरे फन से

चली मैं चलीं हूँ मैं बन ठन के

हाँ चली हूँ मैं बन ठन के 








3 May 2026

क्या खुमार है



क्या खुमार है

दिल ये बेकरार है 

न जाने कब कहां 

और क्यों 

हुआ इस दिल को प्यार है


फासले यूँही 

घटने खुद ब ख़ुद जब लगे 

राहें यूँही 

मुड़ने ख़ुद ब ख़ुद जब लगे 

मंज़िल दूर ही  सही 

मिलेगी मुझको तो ये कभी

मुझ को  है  ये यकी 

दिल को भी  एतबार है



चेहरा कोई 

रहने आंखों में जब  लगे 

बातें  कोई 

करने  ख़ुद से जब लगे

खयालों में जो है अभी

होगा बाहों में  वो कभी 

वो ही दुनिया है अब मेरी 

वो ही तो मेरा करार है 


 

क्या खुमार है

दिल ये बेकरार है 

न जाने कब कहां 

और क्यों 

हुआ इस दिल को प्यार है







2 May 2026

ये दिल की आग जैसी होती है


 हूं.. हूं... हूं 

पानी पे कुछ लिखा है ...

लिखा जो

गर पढ़ लो तुम 

तो जानोगे ......

मोहब्बत की ये

बात कैसी होती है ...

इस दिल में जो लगी है 

वो आग कैसी होती है...  हा हा...


हूं.. हूं... हूं 

नदिया एक जुबानी है 

वो कहती  इक कहानी है

लहरों से जो बनी है

वो राग कैसी होती है 

भंवरों की वो गुंजन 

धुन विहाग जैसी होती है 


हूं.. हूं... हूं 

शामें तो निशानी है 

हर रोज़ आनी जानी है 

सिंदूरी से दिन रैन के 

सुहाग जैसी होती है

धरती और अम्बर के 

 अनुराग जैसी होती है


हूं.. हूं... हूं 

ये यादें तो पुरानी है

जो तुझको अब सुनानी है

ग़म की रातों के उजले 

चिराग जैसी होती है 

बांध रखे हमें एक दूजे से 

ये ताग जैसी होती है 


हूं हूं हूं 

ये दिल की आग जैसी होती है 

हूं.. हूं..

ये दिल के विराग जैसी होती है 


30 April 2026

सांसे गिनती रहती हूं

  



दुनिया से कुछ भी

कहती नहीं मैं 

ख़ुद की भी अब

सुनती नहीं मैं 

गुमसुम गुमसुम 

चुप चुप सी मैं 

खामोशी से 

सन्नाटे बुनती रहती हूं 



उम्र को कौन

खिजाब  लगाए ?

सुख दुख के क्यों 

 हिसाब लगाए?

दुख तो मय का 

पैमाना है

मैं मय खाने में 

रहती हूं 


किसका अब तो 

नाम पुकारे 

किसका रस्ता 

नैन निहारे 

गुम से रस्ते 

गुम सी मंज़िल 

हमनवा को तरसती 

 रहती  हूं 


ख्वाहिश ने भी अब 

दामन ये छोड़ा 

सपनों ने भी अब 

नाता ये तोड़ा 

आस नहीं है

आभास नहीं है

थोड़ी थोड़ी 

जो भी बची है

सांसे गिनती रहती हूं