खुसर पुसर कुछ इधर उधर की
बात मिली जाने किधर किधर की
पर अफवाहें कुछ और कहे
कुछ और ही बाणी बोले
शर्मा जी के छोकरे ने
कोई कांड किया हौले हौले
मिश्राइन की छोकरी से
ली आँख लड़ा हौले हौले
सबको पता है सबको खबर है
शर्माइन का बड़ा सा घर है
घर उसके नौकर चाकर है
बगल में मिश्राएन का घर है
पर
मिश्राइन की लड़की से वो
सीधे मुँह न बोले
पर इन बच्चों में जाने कैसे
इश्क़ हुआ हौले हौले
दिखने में लड़का सुपरस्टार है
अच्छा है और समझदार है।
फ़ौज में अफ़सर बहुत बड़ा है
यहीं पे सारा ही लफड़ा है
मिश्राइन को फ़ौजी धुरंधर
भाये नहीं एक तोले
और लड़के लड़की की कहानी
खाए रही हिचकोले
लड़की भी तो एक नंबर है
दिखने में कितनी सुंदर है
कमसिन कोमल काया उसकी
मोती झरते जब वो हंसती
मिश्राइन अपनी तिजोरी
कभी न लेकिन खोले
और शर्माइन तो बेटे को
बस सोने चांदी में तोले
और एक दिन वो
फ़िर दिन भी आया
इश्क़ ने अपना
रंग दिखलाया
शादी की अर्जी भी धर दी
कोरट मैरिज दोनों ने कर ली
शर्मा जी मिश्रा जी तो अब
क्या तो मुँह भी खोले
पर शर्माइन मिश्राइन में इक
युद्ध हुआ और खूब चले बम गोले
लड़का लड़की फिर
घर को आये
मान मनौव्वल खूब चलाये
मिश्रा माने
मिश्राइन रूठ गई
शर्मा जी तो कुछ न बोले
शर्माइन तो छत से कूद गई
साँस रुकी एक पल को सबकी
कहीं ये दुनिया से तो न सटकी
डॉक्टर आये नब्ज़ टटोले
जिंदा है यें
ले गहरी साँस फ़िर बोले
शर्माइन की
इक टाँग टूट गई
शादी हुई पर शादी टूट गई
बच्चों की तो
हाय किस्मत ही फूट गई
कोरट में अब दिन मास वे डोले
डाइवोर्स की फाइलें खोले
दूर से देखे एक दूजे को
लेकिन कुछ न बोले
हुआ ये क्या क्यों और कैसे
कोई तो भेद खोले
बैरी जग क्यों आड़े आया
या कुंडली पे
साढ़े साती छाया
पास तो है पर
साथ नहीं है
जीने की अब दरकार नहीं है
किसको दिखाये वो ज़ख्म फफोले
कैसे पी ले
वो जहर जो अपनों ने घोले
जग कहता तुम प्यार न करना
जो प्यार करो तो
इकरार न करना
किस्मत के होते
ये खेल निराले
अपनों को देखे या
कोई इश्क़ संभाले ?
इश्क वो मौसम है कि जिसमें
बेमौसम बरसातें हो ले
सर मुंडाते ही इश्क में
पड़ते सर पे ओले
पड़ते है सर पे ओले





