तुम कहते हो मैं
हूं शहद सी मीठी
मैं इमली सी खट्टी
और कभी मैं
कड़वे नीम की
थोड़ी कड़वी कड़वी
मीठी मीठी निबोरी
तेरे इश्क़ की धूनी रोज़ रमाउँ
बन के मैं तो अघोरी
तुम कहते हो
मैं नकचढ़ी हूं
नादान हूं थोड़ी
अल्हड़ बड़ी हूं
कैसे मैं कह दूं
हूं शोख मैं चंचल
मैं चुलबुल बुलबुल
मैं प्रीत नगर के प्रेम गली की
बांकी बांकी गोरी
तेरे इश्क़ की धूनी रोज़ रमाउँ
बन के मैं तो अघोरी
तुम कहते हो मैं
तो तितली हूं
खिलती सी कली हूं
तुझ में घुल जाए जो
वो मिश्री की डली हूं
कैसे मैं कह दूं
मैं ही कुमुदिनी
मैं ही चमेली
भंवरे से मिलने खातिर मैने
लोक लाज सब छोरी
तेरे इश्क़ की धूनी रोज़ रमाउँ
बन के मैं तो अघोरी
तुम कहते हो
मैं प्रेम पताका
मैं प्रेम की भाषा
तेरे जीवन की
मैं ही तो आशा
कैसे मै कह दूं
सांसे मृदंग है
सांसे पतंग है
बांधी है सांसों से तेरी
अपनी सांस की डोरी
तेरे इश्क़ की धूनी रोज़ रमाउँ
बन के मैं तो अघोरी






