17 April 2026

तुम नेमत हो तुम नजराना

 तुम नेमत हो . तुम हो  नज़राना 

तुम मंजिल हो तुम हो ठिकाना 

जाने जाँ .. जाने जाँ 



तेरे ख्याल  तो जूही है 

मोगरा है  कस्तूरी है 

जेहन में जब आते है

रोम रोम महकाते है 

सांस सांस ये संदल संदल कर दे 

नयन नयन ये चंचल चंचल  कर दे

तुझको सोचूं 

तुझसे मिलने का  

हर दिन हर पल ढूंढूं बहाना 

जाने जाँ .. जाने जाँ 



ख़्वाब तुम्हारे सिंदूरी है 

दिल में रहने की मंजूरी है 

जब  आंखों में आते है 

शामों सहर  रंग जाते है 

रंग  में   पिया फ़िर  हमको ...रंग दे

होंठो पे मेरे   होंठों  को धर दे 

तुझको चाहूं 

हां प्यार किया 

इस प्यार को अब ताउम्र निभाना 

जाने जां..जाने जां 



16 April 2026

तुम नेमत तुम नजराना

 



तुम नेमत हो ..

हो नज़राना 

मंजिल मेरी 

तुम मेरा ठिकाना

मेरी मानो...  मानो न 

तुम ये जानो...  जानो न 



तेरे ख्याल  

तो जूही है 

है मोगरा 

कस्तूरी है 

जेहन में मेरे 

जब  आते है

मेरा रोम रोम 

महकाते है 

तुम कह दो  ये सच है न

तुम पे मेरा हक़ है न 

बोलो बोलो 

बोलो न ...बोलो न 



ख़्वाब तुम्हारे 

सिंदूरी है 

इन बिन रातें 

अधूरी है 

ये जब आंखों में आते है

शामों सहर रंग जाते है 

रंग जाओ इनको 

रंग भर दो 

सपनों का मेरा 

वो घर दो न

जाने जां..जाने जां 


मेरी मानो...  मानो न 

तुम ये जानो...  जानो न


15 April 2026

इस तरह न कीजे

 



इस तरह न कीजिए

यूं इन्तहा न लीजिए

दिल है ...दिल की बातें ....

दिल पे न लिजिए



ऐसा कोई तो 

सफ़र भी क्या 

तनहा वो राहें जिनपे 

कोई न चला 

साथी हुआ न जिनका 

या  साथी न मिला 

बददुआ ऐसी किसी को न दीजिए



भंवरा कोई तो ऐसा

बावरा है क्या 

फूलों  से जिसका न हो

कोई वास्ता 

गुनगुनाया नही 

या शोख  न हुआ 

माली ऐसे बाग का हम को न कीजिए



13 April 2026

धानी सी राते

 





धानी सी रातें है

और धानी से दिन 

दिल सजनी का ओ सजना  

लगे न  तेरे बिन 



कोरी कोरी 

गोरी दुपहरिया  

मुझको   जलाए सुन 

पी तो गए है आफिस अपने 

ढलने लगा है दिन 

देहरी खिड़की ताने मारे

मुझको अब गिन गिन 

कब आयेंगे सजना तेरे

कौन से किस पल छिन 



जब आओगे सजना मेरे

खड़ी मिलूंगी मैं तो दुआरे 

बाहों में मुझको भर लेना 

खूब बलैया मेरी लेना


कोई जिरह 

तुमने जो करी तो 

मनमानी  फिर 

कोई करी तो 

माफ़ न  तुमको 

कभी   करूंगी

फिर तो तुमसे बदला लूंगी  

सजना मैं गिन गिन 



सजना प्रेम प्रतिज्ञा तुमसे

सजना प्रेम प्रतिक्षा तुमसे 

तेरे प्रेम की पूंजी ऐसी

जिसका का

 चुका सके   न  हम रिन 
















11 April 2026

डाकिया

  

शहर में तेरे 

डाकिया बाबू 

क्या अब भी  वो आता है ?

पहुंचाने चिट्ठी हर, बाबू 

गली गली  क्या जाता है ?


क्योंकि

 मैने नाम पे तेरे 

भर रक्खे है कागज़ कोरे 

कुछ कागज पे आंसू गिरे  है

कुछ कागज़ पे दर्द लिखें है 

इक कागज़ पे नाम लिखा है 

जिसमें दिल का हाल लिखा है 

पूछा है कब आओगे तुम 

मुझको कब ले जाओगे  तुम 

सुनो ओ सजना मेरे बलमा

अब के मुझमें 

मुझ से  मिलना


जब मिलो तो  तुम 

इतना बस कर दो

सारा फलक 

आंखों में धर दो 

चंदा  को पिघला के धर दो

 झांझर  बूंदे  उसके गढ़ा दो ।

पायल भी पैरों की  बनवा दो 


शाम  सुनहरी धूप रुपहली 

 ऐसी  इक चोली सिला दो

फूलों का लहंगा बनवा दो 

तारों की झालर लगवा  दो 

चुनर में किरणें जड़वा दो


रात अगर जो  स्याही  दे दे

काजल सा उसको सजवा दो

रात रानी का गुच्छा हो तो

 वेणी  में उसको गूंधवा दो 



मैं फिर तुमसे तुममें मिलूंगी 

इंद्रधनुष के रंग बुनूंगी 

तेरी रग रग में  यूं घुलूँगी 

मीठी अगन सी तुझ में जलूँगी 

इत्र सी सांसों में महकूंगी 

कि तुम  तो मेरे राजा हो ना 

रानी हूं मैं रानी रहूंगी 

मैं तेरी होके तेरी रहूंगी 

तेरी होके तेरी रहूंगी 



पर दशकों की देर हो गई 

उन सुबह की भोर हो गई 

अब कोई न खत ये पढ़ेगा 

टूटा जो ये भोर का तारा 

ताउम्र बस खुद में जलेगा 

ताउम्र बस खुद में चलेगा 







ख्वाहिश हूं मैं तेरी




 ख्वाहिश हूं  मैं तेरी 

मैं तेरा ख़्वाब हूं 

धड़कन हूं मैं तेरी 

तेरी हर साँस हूं 



मांगा है मुझको 

तूने मदन से .

आई हूं मैं तो 

नील गगन से.

 रागिनी जैसे प्रेम हुआ  है

मैं प्रीत की इक राग हूं 


ख्वाहिश हूं मैं  तेरी 

मैं तेरा ख़्वाब हूं




लिखा है मुझको

तूने बदन पे 

होंठों से अपने 

बड़े जतन से 

संदल की धूप  हुआ  तू 

मैं जलती हुई आग हूं 

ख्वाहिश हूं मैं  तेरी 

मैं तेरा ख़्वाब हूं


ख्वाहिश हूं मैं  तेरी 

मैं तेरा ख़्वाब हूं 

धड़कन हूं मैं तेरी 

तेरी हर साँस हूं













हिचकी यादों की जगा गई

 



लगा मुझे  क्यों 

इक नज़र में 

दिल को  तेरे 

मैं भा गई 

लगा मुझको

जैसे नींदों में 

हिचकी यादों की 

तुझको  जगा गई



उस गली के मोड़ पर

उस फलक के छोर पर 

प्रीत की लाली खिली 

तारों हर सूं सजा गई 


फूल कोई खिला चमन में

पंछी  जैसे उड़े ग़गन में 

कली इशक की 

बागों में मेरे खिला गई


इशक का काजल  लगा लूं 

नाम होंठों पर सजा लूं 

नाम तेरा नजरें तेरी 

जिस्म को  धड़का गई 


तू जहां है मैं वहीं हूं

तू नहीं तो मैं नहीं हूं 

तेरा होना मेरा होना 

क़यामत मुझे समझा गई 


लगा मुझको 

जैसे नींदों में 

हिचकी यादों की 

  तुझको जगा गई


क्यों...

है न?




तुम अक्सर मेरे ख्वाबों में


 
तुम अक्सर मेरे ख्वाबों में 

आते हो,रह जाते हो 

अनकही उन बातों को 

सपनों में कह जाते हो



तुम कहते  ओ जाना मेरी 

यूं तो तुमको देखा नहीं 

हम तुम तो कभी मिले नहीं 

और मिलना भी होगा नहीं 

पर सुन लो ओ जाना मेरी

फ़िर भी तुम हो  तुम हो मेरी 

मैं ख्वाबों में ,  आऊंगा 

ऐसे जहां ले जाऊंगा 

अपना जहां  एक घर होगा 

कांधा तेरा मेरा सर होगा 

तेरे सजदे ज़िंदगी 

होगी मेरी  बंदगी 

तारों भरा  अम्बर होगा 

मेरा शामों सहर होगा

चांद वहां तुम होगी मेरी  


ज़िक्र तेरा और यादें तेरी

मेरी सांसों को धड़काते है

छू के मुझको आँखें तेरी 

संदल सा महकाते है 










बिखरा यहां हर सूं कोहरा


 


 बिखरा यहां हर सूं ....

कोहरा

बूझे  बदन न कोई  ....

चेहरा 


एक सेर उदासी थी 

कुछ तोले ग़म के थे 

पर वक्त तराजू था 

कहीं कुछ नहीं ठहरा 


कुछ दूर थे सन्नाटे 

आवाज़ भी गुम सी थी 

क्यों कोई यहां सुनता 

हर शख्स यहाँ बहरा 


सूखा एक मन में था 

सूखा ये तन भी था 

हर आंख भी सूखी थी 

सब ओर यहां सहरा 


कहीं कोई वजह तो हो 

है हार तो जीत भी हो 

मनमीत कोई तो हो 

न प्रीत पे हो पहरा