इश्क़ की कलियाँ
जब से खिली है
भँवरे सा मन ये हुआ
खोया खोया
बहका बहका
पतंगे के जैसे हुआ
कि ऐसी लगी धुन
करने लगा है दिल
गुनगुन गुनगुन
गुनगुन गुनगुन गुन
ओस की गीली
गीली बूँदे
अम्बर से छम छम गिरे
बावरा मन अब
बस में नहीं है
ठंडी सी आहे भरे
टिप टिप बरसे
बदरा छुन छुन
कि करने लगा है दिल
रुमझुम रुमझुम
रुमझुम रुमझुम झुम
बालों की भीनी
भीनी खुशबू
सांसो में ऐसे उलझे
मोम बदन काँच है जैसे
छूने से टूटे पिघले
ख़्वाब तुम्हारे हमको पुकारे
ख्वाहिश शोर करे
रागिनी जैसा इश्क़ हुआ
कि दिल ये हुमहूम हुमहूम
हुमहुम हुमहूम करता यूँ फिरे
कि दिल मेरा गुनगुन गुनगुन
गुनगुन गुनगुन करता यूँ फ़िरे...



