जाने दे
टूटे टूटे धागों को
रूठे रूठे ख्वाबों को
भूले बिसरे वादों को
जाने दे
जाने दे ...जाने दे
जाने दे ...जाने दे
पंख जो टूटे थे कभी
डंक जो चुभे थे सभी
घाव जो हरे है अभी
उन ज़ख्मों को
भर जाने दे
सूखे मन को
हरियाने दे
मुझको घर.....जाने दे....
सीली सीली यादें हैं कई
बातें अब आई और गई
रीतें हर रात क्यों नई
बीती बातों को
भूल जाने दे
रीती आँखों को
सूख जाने दे
मुझको घर.....जाने दे....
जाने दे ...
अहा हा... ह्म्मह्म
जाने दे
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