17 June 2026

जाने देना

 जाने देना...

जैसे पेड़ों से हो कहना ,

कि तोड़ दे  वो 

सूखी शाखें 

गिरा दे वो 

पीले सूखे भूरे पत्ते 

पतझड़ के आ जाने पे 


​जाने देना...

जैसे बहती हवाओं से

हो कहना 



भूल जाएं वो साँस लेना 

​जाने देना...

जैसे अम्बर से कहना हो,

कि भूल जाए उस ज़मीं को जो उसके तले है!

​मगर फिर भी... जाने देना ही तो है,

ज़िंदगी को यह मौक़ा देना कि वह—

नूतन हो सके,

पुनर्जीवित हो सके,

पुनर्जन्म ले सके,

और नव-सृजित हो सके!

​तो आओ...

अब जाने भी दो,

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