धानी सी रातें है
और धानी से दिन
दिल सजनी का ओ सजना
लगे न तेरे बिन
कोरी कोरी
गोरी दुपहरिया
मुझको जलाए सुन
पी तो गए है आफिस अपने
ढलने लगा है दिन
देहरी खिड़की ताने मारे
मुझको अब गिन गिन
कब आयेंगे सजना तेरे
कौन से किस पल छिन
जब आओगे सजना मेरे
खड़ी मिलूंगी मैं तो दुआरे
बाहों में मुझको भर लेना
खूब बलैया मेरी लेना
कोई जिरह
तुमने जो करी तो
मनमानी फिर
कोई करी तो
माफ़ न तुमको
कभी करूंगी
फिर तो तुमसे बदला लूंगी
सजना मैं गिन गिन
सजना प्रेम प्रतिज्ञा तुमसे
सजना प्रेम प्रतिक्षा तुमसे
तेरे प्रेम की पूंजी ऐसी
जिसका का
चुका सके न हम रिन

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