11 April 2026

हिचकी यादों की जगा गई

 



लगा मुझे  क्यों 

इक नज़र में 

दिल को  तेरे 

मैं भा गई 

लगा मुझको

जैसे नींदों में 

हिचकी यादों की 

तुझको  जगा गई



उस गली के मोड़ पर

उस फलक के छोर पर 

प्रीत की लाली खिली 

तारों हर सूं सजा गई 


फूल कोई खिला चमन में

पंछी  जैसे उड़े ग़गन में 

कली इशक की 

बागों में मेरे खिला गई


इशक का काजल  लगा लूं 

नाम होंठों पर सजा लूं 

नाम तेरा नजरें तेरी 

जिस्म को  धड़का गई 


तू जहां है मैं वहीं हूं

तू नहीं तो मैं नहीं हूं 

तेरा होना मेरा होना 

क़यामत मुझे समझा गई 


लगा मुझको 

जैसे नींदों में 

हिचकी यादों की 

  तुझको जगा गई


क्यों...

है न?




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