आते हो,रह जाते हो
अनकही उन बातों को
सपनों में कह जाते हो
तुम कहते ओ जाना मेरी
यूं तो तुमको देखा नहीं
हम तुम तो कभी मिले नहीं
और मिलना भी होगा नहीं
पर सुन लो ओ जाना मेरी
फ़िर भी तुम हो तुम हो मेरी
मैं ख्वाबों में , आऊंगा
ऐसे जहां ले जाऊंगा
अपना जहां एक घर होगा
कांधा तेरा मेरा सर होगा
तेरे सजदे ज़िंदगी
होगी मेरी बंदगी
तारों भरा अम्बर होगा
मेरा शामों सहर होगा
चांद वहां तुम होगी मेरी
ज़िक्र तेरा और यादें तेरी
मेरी सांसों को धड़काते है
छू के मुझको आँखें तेरी
संदल सा महकाते है

No comments:
Post a Comment