16 March 2026

आहिस्ता बोलिये कहीं version १




आहिस्ता बोलिये कहीं 

सुन ले न ये फ़िराक़ दिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल 


खामोश कुछ ये  तन्हाइयां है

कुछ राज है कुछ निशानियां 

लब तो है बिल्कुल खामोश से

 नज़रों  से होती बयानियां 

 शोखी से देखिये कहीं 

बहके न ये फ़िराक़ दिल

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल



नाज़ुक बड़ा है हाल-ए-दिल

 नाशाद है बीमारे दिल

परछाइयां की आहट  से 

बेचैन है बेहाल दिल 

नज़रें ज़रा संभालिए 

नज़रे  जाये कहीं न मिल 

धड़केगा ज़ोर ज़ोर से

संभलेगा न फ़िर जनाब दिल
















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