आहिस्ता बोलिये कहीं
सुन ले न ये फ़िराक़ दिल
धड़केगा ज़ोर ज़ोर से
संभलेगा न फ़िर जनाब दिल
खामोश कुछ ये तन्हाइयां है
कुछ राज है कुछ निशानियां
लब तो है बिल्कुल खामोश से
नज़रों से होती बयानियां
शोखी से देखिये कहीं
बहके न ये फ़िराक़ दिल
धड़केगा ज़ोर ज़ोर से
संभलेगा न फ़िर जनाब दिल
नाज़ुक बड़ा है हाल-ए-दिल
नाशाद है बीमारे दिल
परछाइयां की आहट से
बेचैन है बेहाल दिल
नज़रें ज़रा संभालिए
नज़रे जाये कहीं न मिल
धड़केगा ज़ोर ज़ोर से
संभलेगा न फ़िर जनाब दिल

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