तुम सांझ मेरी रातों के
दिन के सवेरे
जाने क्यों ये लगता है
बिन फेरे हम तेरे
न तो तेरी ख्वाहिश ही
न ख्वाबों का बसेरा
जाने फिर क्यों रहता है
इंतज़ार तेरा
आँखे भी तो तकती है
राहें तेरी ऐसे
बिछ जाएंगी राहों में
ताउम्र जैसे
नींदों में भी तेरी
यादों ने डालें डेरे
जाने क्यों ये लगता है
बिन फेरे हम तेरे
फ़र्श पे मेरा घर है
अर्श पे है तेरा
जीना नहीं कोई
बस चुप सा अंधेरा
साँसें फिर भी तकती है
राहें तेरी ऐसे
साँसों में समाएंगी
साँस साँस जैसे
धड़कनों ने बांधे है
धड़कनों के घेरे
जाने क्यों ये लगता है
बिन फेरे हम तेरे
तुम सांझ मेरी रातों के
दिन के सवेरे
जाने क्यों ये लगता है
बिन फेरे हम तेरे

No comments:
Post a Comment