मेरा तुझसे
तेरा मुझसे
इस रिश्ते की बात अलग है
कितना मैंने
तुमको जाना
जितना जाना
अपना माना
वो जो मुझसे
जुड़ के जुड़ा है
उस हिस्से की बात अलग है
कब सोचा कि
तुमको पा लूँ
कब चाहा तुमको
मैं मना लूं
चाहे मैं
छोटा सा किस्सा
इस किस्से बात अलग है
धड़कन कब से
बोल रही है
आँखे कुछ कुछ
तोल रही है
होंठों ने होंठो पे लिखा कुछ
उस लिक्खे की बात अलग है
हिज्र के तो है
ढाई आखर
वस्ल में भी
है ढाई अक्षर
हिज्र वस्ल है इश्क़ के हिज्जे
हर हिज्जे की बात अलग है

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