16 February 2026

कारीगरी इस दिल की



 कारीगरी इस दिल की 

सुनकर  भी क्या तुम करोगे 

हँस दोगे रो दोगे 

और तुम हम सी  आहे भरोगे 


कैसे बताए 

कितना था नादां 

कितना था सीधा साफ दिल 

बातें सब सुनता था 

जिरह न करता था 

यूँ तो बड़ा था  अशराफ दिल 


दिन यूं ही कटते थे 

हम और दिल खटते थे 

फ़िर राहों में कोई गया यूँ मिल 

धक धक यूँ धड़का 

रह रह के तड़पा 

उनके लिए  गुस्ताख दिल 


आंखें न कह पाई 

कहे बिन न रह पाई 

बोले  ये कैसे मुसाफ़ दिल 

मुझसे वो बोले न 

जस्बातों को खोलें न 

कैसे है वो इल्ताफ़ दिल 


कैसे बताएं 

कि इश्क़ निकम्मा

और हम कैसे हुए इसराफ दिल

ख़ुद को ही खोया 

और उनको न पाया 

मांग रहा इंसाफ दिल 







 




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