कारीगरी इस दिल की
सुनकर भी क्या तुम करोगे
हँस दोगे रो दोगे
और तुम हम सी आहे भरोगे
कैसे बताए
कितना था नादां
कितना था सीधा साफ दिल
बातें सब सुनता था
जिरह न करता था
यूँ तो बड़ा था अशराफ दिल
दिन यूं ही कटते थे
हम और दिल खटते थे
फ़िर राहों में कोई गया यूँ मिल
धक धक यूँ धड़का
रह रह के तड़पा
उनके लिए गुस्ताख दिल
आंखें न कह पाई
कहे बिन न रह पाई
बोले ये कैसे मुसाफ़ दिल
मुझसे वो बोले न
जस्बातों को खोलें न
कैसे है वो इल्ताफ़ दिल
कैसे बताएं
कि इश्क़ निकम्मा
और हम कैसे हुए इसराफ दिल
ख़ुद को ही खोया
और उनको न पाया
मांग रहा इंसाफ दिल

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