कारीगरी इस दिल की
सुनकर भी क्या तुम करोगे
हँस दोगे रो दोगे
और तुम ...हम सी ही आहे भरोगे
कैसे बताए
कितना था नादां
कितना था सीधा साफ दिल
बातें सब सुनता था
जिरह न करता था
यूँ तो बड़ा था अशराफ दिल
नादान दिल की नादान बातें
जानोगे , क्या ही करोगे ?
हँस दोगे रो दोगे
और तुम ...हम सी ही आहे भरोगे
दिन यूं ही कटते थे
हम और दिल खटते थे
फ़िर राहों में कोई गया यूँ मिल
धक धक यूँ धड़का
रह रह के तड़पा
उनके लिए गुस्ताख दिल
हिज्र के मौसम में यादों के खंजर
कब तक आखिर सहोगे
हँस दोगे रो दोगे
और तुम ...हम सी ही आहे भरोगे
आंखें न कह पाई
कहे बिन न रह पाई
बोले भी कैसे मुसाफ़ दिल
वो भी तो बोले न
जस्बात खोलें न
कैसे है वो इल्ताफ़ दिल
उनके सितम दिल में कब तक छुपाये
कैसे बयाँ भी करोगे
हँस दोगे रो दोगे
और तुम.... हम सी ही आहे भरोगे
कैसे बताएं
कि इश्क़ निकम्मा
और हम तो हुए इसराफ दिल
ख़ुद को ही खोया
और उनको न पाया
मांग रहा इंसाफ दिल
इश्क़ कभी भी उनको नहीं था
अब उम्मीद क्या ही करोगे
हँस दोगे रो दोगे
और तुम ....हम सी आहे भरोगे
• अशराफ- शरीफ़
• मुसाफ़- शुद्ध
• इलताफ -मेहरबानी
• इसराफ -fizulkharchi

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