21 January 2026

माघ लिखे फाल्गुन को पाती



 माघ लिखे फाल्गुन को  पाती 

आ रही   होली मदमाती 


खिले पलाश गेंदा भी चहका 

सरसों   खड़े खड़े क्यों बहका


पेड़ो पे हरियाली छाई 

कलियों पे तितली मंडराई 


नीले पीले फूल खिल गए 

भंवरों के भी दिल मिल गए 


हरे रंग की बिछी चटाई 

रंग रंग की उसमें कढ़ाई 


मौसम के सुर ताल बदल गए

सर्द दिन गर्मी में ढल गए


रंगों से रंगो की बातें 

हरे से पनघट हरे अहाते 


रंग रंग आपस में घुल गए 

रंगों के उत्सव में  ढल गए


होली ने हुड़दंग मचाया

गुलाल अबीर गालों को भाया 


चेहरे हुए फिर नीले पीले 

मन से सूखे तन से गीले 


बैर भूलकर यार जो आया

हर किसी  को  गले लगाया 


फाल्गुन फाल्गुन रटते रहियो 

बम बम भोले जपते रहियो






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