20 January 2026

आई होली



बीता माघ और  फागुन आया 

होली का त्यौहार ले आया


रंगो से पिचकारी भर गई

बाल गोपाल की टोली सज गई


सरर सरर पिचकारी बोले 

भीगे भीगे तन मन डोले 


छेड़ रहे सब लोग लुगाई 

मचा हुड़दंग कि होली आई 


थाली में फिर गुझिया सज गई 

खाने की एक होड़ सी लग गई 


नीला लाल हरा रंग डाला 

 क्या जीजा क्या भाई का साला 


कीचड़ से लथपथ दुई भाई 

अम्मा रह गई  देती दुहाई 


डांट पड़ेगी , होगी धुनाई 

कैसे होगी  ये रंग  धुलाई 


डामर ग्रीस तेल और गोबर 

पैठे नदिया पैठे  पोखर


बाट जोहती बैठी वो पनघट 

लटपट झटपट सुन रे नटखट 


रंग दी बिट्टी की  घोड़ा गाड़ी 

बुक्के फाड़ वो रोई  दहाड़ी 


भात भात की रस्में निभाई 

भूल दुश्मनी सब गले लगाई 


समय बनाए कैसी रंगोली 

जीवन भी सुख दुख  की होली

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