फासले जाने क्यूँ हो गए
हम थे क्या और
क्या हो गए
कब कहां कोई इंकार है
प्यार तब भी था
इश्क भी आज है
प्यार के बस मायने खो गए
हम थे क्या और
क्या हो गए
याद है मुझको बातें सभी
लिखी पाती जो तुझको कभी
बस ये अल्फ़ाज़ कम हो गए
दूरियां सी वो इक बो गए
देखना तुझको इकटुक यूहींं
चैन इक दूजे बिन था नहीं
बेकरार थे, फिर हो गए
अब तो बेहिस से हम हो गए
है ख़बर जल रही आग है
ज़ख्म गहरा है हरा दाग है
थे मरहम, टीस अब हो गए
रिसता सा ज़ख्म ईक हो गए
कर लिया तय तुमने अब यही है
कि ऐसे हम तेरे काबिल नही है
सोचा क्या था और क्या हो गए
तन्हा हम भीड़ में हो गए
फासले जाने क्यूँ हो गए
हम थे क्या और
क्या हो गए

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