5 May 2017

ख़याल परिंदे - ले चल मुझे तू वहाँ - its song of my soul


Courtesy Internet 
ख़याल परिंदे 
किसी की न माने, 
ले के चले जिस जहाँ, 
ले चल मुझे तू वहाँ ....


रिसतीं है रातें, 
सिसकते ये दिन है, 
टूटा ग़मों से 
सहर का बदन है। 
रहना न चाहूँ यहाँ,
ले चल मुझे तू वहाँ ...... 

गिरते ये पत्ते,
इसक के शज़र से, 
भटकते है दर को,
कितने पहर से ,
ठौर वो पाए जहाँ  ...... 
ले चल मुझे तू वहाँ  ......