18 March 2017

सूरज के भेजे में गोली मार दी !!


Courtsey :Internet 
मैंने  सूरज  को गोली मार दी
बड़ी गर्मी थी उसमे, उतार दी !

अरे, अभी तो आया ही मार्च था 
क्यों जलाया  गरमी का टोर्च था ?

सूरज को था कितना attitude !!!
मैं बोली -चल, परे हट मुए dude !

 निकाली बंदूक़ उस पे तान दी 
बस लूँगी प्राण उसके, ठान ली। 

ये मुए बादल बीच में आ गए 
गोली सीने पे, अपने खा गए! 

चलाई गोली थी - धाँय-धाँय
बिखरे  बादल सारे  दाएँ बाएँ।  

तितर बितर फिर धूप हो गई  
कहीं पे छांव ख़ूब हो गई ! 

दिन भी कुछ नासाज़ हो गया 
और शाम का आग़ाज़ हो गया ! 

लगे पत्ते पत्तों को चूमने
सारे शज़र लगे नशे में झूमने !

फूलो को भी  पसीना आ गया  
ख़ुमार दिमाग़ पे जैसे छा गया !

ग़श खाकर अम्बर भी गिर गया 
होना था ये  कि दिसम्बर था  गया! 

अब तो सबके  जलने की बारी आ गई 
Dermi कूल,  पिचकारी  आ गई !

जले हम सब , फिर जलते ही रह गए 
और  बस अपने हाथ मलते ही रह गए 

सोचा,  काहे  गर्मी की आरती उतार   दी ?
 कहाँ मैंने  सूरज के भेजे में गोली मार दी  !!