28 January 2017

बेफ़िक्र और बेवजह


बेफ़िक्र और  बेवजह 
ख़ुशबुओं की तरह, 
 ले चल मुझे ऐ  हवा 
चाहे जहाँ ...जिस तरह 

ख़ाली सी सड़कों सी   
है मेरी ......  तनहाइयाँ 
अंधेरो  में खो  गई है  
कहीं मेरी ...... परछाइयाँ 
खो गई  शोर में ......  
खामोशियाँ जिस तरह ...... 
आ चल  संग हवाओं के  
जाने कहाँ किस तरह ......