9 August 2016

दिल के agreement पे, तू sign कर दे !

अभी अभी तो दबे पाँव मेरा ४५वाँ जन्मदिन आया था और मुझ १६ साल की षोडशी को १७ का कर गया !
४५ और १६ ??  - चौंकिए मत साहब !  
हमने पिछले दिनों अपने ट्वीट हैंडल से ट्वीट किया था -  " Though 45, I feel and behave like 16 - am I mentally challenged?   कुल मिला कर पांच सात प्रतीक्रिया  आई थी - सार यही था - don't grow  up !
फिर साहब, सोलहवे साल ने फिर ज़ोर दिखाया -
हमने अपनी pinned  ट्वीट रख कुछ यूँ 
"Until today I was childish ... 
Now I want to be childlike ...
 In short I have decided noṭ to grow up !! 
That's me - Sandhya !"

कुल मिला कर मुझ में दो- चार संध्या तो रहती ही होंगी ।   यक़ीनन ! 
जाने ये सोलह बरस की संध्या अब क्यूँ सर उठा रही है - नहीं नही! आज की बात   नहीं है, दशको बीत गए है इसे मन की ड्योढ़ी पे बैठे हुए ! 
  जब भी  अकेली होती हूँ - किताबो या लंबे रास्तो पर या रात अकेले में गाने सुनते हुए -  ये   आ ही  जाती है।
घंटो बैठ, हम दोनों बातें करते है - कुछ वो कहती है - और कुछ मैं। आज कल इसने अपना रास्ता ब्लॉग,  कलम से भी निकाल  लिया है। मैं भी इसकी अल्हड बातो को मान लेती हूँ अक्सर !
अब इस रचना को ही ले लीजिये - अरे नहीं! ये मैंने नहीं लिखी है !! ये तो उस पगली , अलह्ड़  षोडशी ने लिखी है !
मुझ पर भला अब इस उम्र में इस तरह की कविता लिखना शोभा देता है क्या - नहीं न ??
खैर , मेरी  छोड़िये - उस नादान की सुन लीजिये -  



दिल के agreement पे,
  तू sign कर दे !
 या प्यार करले मुझसे  
या दिल से resign कर दे !

तुझसे मिली हूँ जबसे ,
Confine ख़्वाबों में हूँ तबसे!
ये mind कुछ सुने ना,
Feelings overtime करे है जबसे !
Accept कर तू मुझको 
 या  offer मेरा  decline कर दे! 
सुन, दिल के agreement पे
 तू sign कर दे

इश्क़ प्यार मोहब्बत love का 
regime हुआ है जबसे,
माँगा तुझे तब रब से, 
है तू दिल में enshrine तब से !
बरस के हर दिवस को आ तू ,
मेरा दिन Valentine कर दे
सुन, दिल के agreement पे
 तू sign कर दे