कभी कभी युहीं
खामोशियों को सुनने का
जी करता है।
कोई न हो पास फिर भी
किसी के पास होने को
जी करता है।
रास्ते है पास,
जाने क्यों है मंज़र उदास ?
क्यों तुझे खोकर, पाने को
जी करता है।
तुझसे दूर होकर
तेरे पास होने
जी करता है।
सदियों पहले रूह ने
जिस्म को मेरे छोड़ा।
तुझको पाकर
फिर से जीने को
जी करता है।
अपनी रूह से
तेरी रूह को छूने को
जी करता है।
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