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3 June 2015

इश्तिहार की दौड़ में

इश्तिहारों में दौड़ लगी है । किसको कैसे लूट ले ये होड़ लगी है ।

फैशन की देखो
फैली महामारी । अंधी हो गई ये दुनिया सारी ।

पेप्सी और कोला में जंग छिड़ी है! बोलो ये जनता किसके संग खड़ी है?

अरे गोरेपन की ये क्रीम लगा लो। इस साबुन से तन को उजला बना लो।

KFC McDonald का
फैला ये मायाजाल। खा लिया जो पिज़्ज़ा बर्गर जैसे हो गए सब निहाल !

सुनो सुनो अरे ओ
ये शैम्पू लगा लो ! horlicks पी कर तुम
अपनी अक्ल बढ़ा लो !!

क्या ये पेस्ट सही है? अरे , उसमें नीबू नहीं है !! इसमें तो देखो नमक है डाला अब है लाइफ ये झींगालाला

मिनिटो में कीटाणु भी हो जाते है ग़ुम ! ये क्लीनर करता है 
उनसे ढिशुम ढिशुम ढिशुम !!

वो बाइक है देखो कितनी प्यारी। उस डिओ पे सारी कुड़ियाँ जाए वारी वारी !!

MNC की तो हो गयी देखो, चांदी चाँदी !! खर्चो ने अपनी फिर सीमाएँ लाँघी !!

ये झूठ फरेब का जंगल देखो। मचता रोज़ यहाँ नया, दंगल वो देखो !!

सुनो, गौर से ओ, लुटने वालो !! आँखों से, मोह की पट्टी हटा लो !! बस!!! और नहीं अब हमको है सहना !! है जागरूक हम
जागरूक ग्राहक बनके हमें है रहना !!


7 April 2015

काश ! ए इंसान तू गधा होता !

काश ! ए   इंसान  तू गधा होता !
न कोई नया इन्वेंशन बना होता !
न किताबो में उनके बारे में
भर भर के लिखा होता !
यु पढ़ने  और पढ़ाने का
सिलसला ना चला होता !


काहे का इतिहास और
काहे को ये भूगोल हुआ होता ?
ना अंग्रेजी ना हिंदी का
झोलमझोळ हुआ होता  !
ए बेमुर्रवत इंसान!! तू दूर
किसी खेत में चर रहा होता   !!

न काटता तू पेड़ और पहाड़
और न नदिया गन्दी कर रहा होता
रहता तू भी जंगल में
और  शेर भालू से डर रहा होता
होता गधा तो  आज तू भी
कहीं ढेंचू -ढेंचू  कर रहा होता
अरे जो हो  कम से कम
पढ़ाई  तो नहीं कर  रहा होता !!