आईना मुझसे कहने लगा है ...
तुम आजकल हो रहते कहाँ ?
तुम में तुम अब दिखते नहीं हो
है कौन तुझ में जी रहा ?
बता.... हाँ बता... बता...
तुम्हारी आँखे जो साँवली है
रहती है खोई ज़रा !
लब तुम्हारे जो है सुर्ख गहरे
खुलें क्यूँ रहते ज़रा?
है क्या ये जादू , हुस्न का ये ?
या है असर इश्क़ का ....!!
इश्क़ का
इश्क़ का...
मुझसे पूछे अब तो बता दे
क्या इश्क़ तुमको हुआ?
अक्स जो तेरे बेहद हसीं है
ख़ामोश क्यूँ है भला?
है क्या ये जादू , हुस्न का ये ?
या है असर इश्क़ का ....!!
बता.... हां बता... बता
बातें तुम्हारी जो बोलती थी
क्यूँ वो चुप है भला ....
रहने लगा है क्या कोई तुझमें
या तू है कहीं लापता...
है क्या ये जादू , हुस्न का ये ?
या है असर इश्क़ का ....!!
बता.... हाँ बता... बता...
मैंने कहा फ़िर आईने से
हां इश्क़ मुझको हुआ !!
इश्क़ सबसे प्यारी नेमत
इश्क़ रब की दुआ
हाँ ये है जादू , हुस्न का
हां ये असर इश्क़ का ....!!
इश्क़ का ... अहा हा हा
इश्क़ का...
ह्म्म
हाँ इश्क़ का
ह्म्म ह्म्म
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