3 May 2026

क्या खुमार है



क्या खुमार है

दिल ये बेकरार है 

न जाने कब कहां 

और क्यों 

हुआ इस दिल को प्यार है


फासले यूँही 

घटने खुद ब ख़ुद जब लगे 

राहें यूँही 

मुड़ने ख़ुद ब ख़ुद जब लगे 

मंज़िल दूर ही  सही 

मिलेगी मुझको तो ये कभी

मुझ को  है  ये यकी 

दिल को भी  एतबार है



चेहरा कोई 

रहने आंखों में जब  लगे 

बातें  कोई 

करने  ख़ुद से जब लगे

खयालों में जो है अभी

होगा बाहों में  वो कभी 

वो ही दुनिया है अब मेरी 

वो ही तो मेरा करार है 


 

क्या खुमार है

दिल ये बेकरार है 

न जाने कब कहां 

और क्यों 

हुआ इस दिल को प्यार है







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