16 February 2017

बादल पे पाँव मेरे - Edited

बादल पे पाँव मेरे, 
सपने मैं देखूँ तेरे
सूझे न कुछ भी मुझको    
 अब तो  साँझ और सवेरे,
कोई तो बताये मुझको 
ये क्या हुआ रे ?

ख़ुद से ही करती हूँ मैं ,
दिन दिनभर कितनी बातें ...
आँखो ही आँखों में अब,
कटने लगी है रातें ...
देखो न पलकों में  तेरा  
 सपना सो गया रे ... 
कोई तो बताये मुझको 
ये क्या हुआ रे ?

तितली सी उड़ रही हूँ,
 गुलशन  में तेरे आ के 
झरने सी बह रही हूँ,
 दरिया तुझ को  बनाके 
मेरे फलक का तू   ही  , 
चाँद  हो गया रे 
कोई तो बताये मुझको 
ये क्या हुआ रे ?                              संध्या राठौर 



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