21 January 2026

ऑनलाइन प्यार

 वो बैठे वहां पर

होके निढाल 

सोचा चलो 

जाने उनका भी हाल 


जाके  देखा पास उनके

चेहरा पे पतझड़  

फीलिंग्स पे उनकी 

था आया खरमास 


बिखरे से बाल 

हाल बेहाल 

थे बिल्ली से  भीगे

ये माई के लाल 


सकपकाए 

हम बौखलाए 

आखिर तो किसने 

किया उनका

 ऐसा ये हाल


उम्र उनकी 

चौपन सी थी कुछ

जवानी में उनकी 

रवानी बची थी कुछ 


पूछा तो जाना 

कोई फ्रॉड हुआ था 

ऑनलाइन किसी से

उन्हें प्यार हुआ था


प्रोफाइल में थी वो 

षोडशी  सी कमसिन 

साथ जीने की खा ली

कसमें भी एक दिन 


आखिर मिलन का 

दिन वो आया

रजिस्ट्रार ऑफिस में 

मोहतरमा ने बुलाया 


सूट बूट में सज्जित

केशो को रंग के 

पहुंचे रजिस्ट्रार ऑफिस

सुनहरे ख्वाबों को संग ले 


आतुर सी आंखों 

से ऑफिस  टटोला 

कमसिन नहीं थी 

वहां कोई बाला 


अधेड़ सी  वहां 

एक स्त्री थी बैठी 

साथ  में  उसके  

चार बेटा बेटी 


लपक के वो फिर 

मोहतरमा आई 

पलकें झुका वो 

थोड़ा लजाई 


बोली सुनो जी 

चलो ब्याह कर ले 

इन बालकों को 

सनाथ कर दे


हक्के बक्के ये

जनाब रह गए

सुंदर महल वो 

ख्वाबों के  ढह गए 


आंखों के आगे 

अंधेरा सा छाया 

सरपट भागे 

जैसे भूत आया


डैडी डैडी की 

 बड़ी आवाजें आई 

मोहतरमा ने भी

दी कितनी दुहाई 


 बच्चों के पप्पा 

अरे ओ हरजाई 

क्या तुझ को मैं अब

रास न आई 


साहब से तब से ही

टूटे टूटे है 

खुद ही खुद से वो

रूठे रूठे हैं 


जान बातें ये सब 

हमने पीटा माथा 

ऑनलाइन से सुनो सब 

सब तोड़ो ऐसा नाता 


फंसना न तुम भी 

जालों में ऐसे 

लुट तो जाओगे तुम भी 

इन जनाब जैसे 






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